सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अति-योग्यता अपने आप में अयोग्यता नहीं है, हालांकि ऐसा कोई सर्वमान्य नियम नहीं है कि किसी पद के लिए आवश्यक बुनियादी योग्यता से अधिक योग्य उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
कोर्ट ने कहा कि अगर मास्टर डिग्री धारक को चपरासी की नौकरी पर नियुक्त किया जाता है, तो उन उम्मीदवारों का क्या होगा जिनके पास 12वीं कक्षा से आगे की पढ़ाई करने का कोई साधन नहीं है?
इस संबंध में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने कहा कि कई बार नियोक्ता को सही स्थान पर सही लोगों की जरूरत होती है न कि हमेशा उच्च योग्यता वाले लोगों की.